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Showing posts from September, 2019

मेरी माँ मेरी जन्नत।

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 जन्नत क्या है ? कहाँ है? क्या सच में होती है?  इसका जवाब अगर  सोच समझकर दिया जाय तो जवाब हैं हाँ।  जन्नत होती है।  Image from internet एक बार जरा फिर सोचिये  जब हम अपने parents की खैरियत में होते है, जब हम उनकी नजरो से ओझल हुए बिना बेफिक्र झूमते हैं।  जब वक़्त कैसा भी हो, हालात कैसे भी हो सर्दी हो या गर्मी ,धुप हो या छाव हमे कभी किसी बात का गम नहीं होता कोई शिकायत नही होती क्योंकि हम जानते हमारी प्यारी प्यारी माँ हमे कुछ नही होने देगी।  उनके होते  हमे कोई डर नही होता ।यानी जब हमारे साथ उनका साथ होता है।  वो पल जन्नत है यार.....! न जाने इस दुनिया में कितने धर्म है जो जन्नत की अपनी अपनी परिभाषा, मतलब बताते  हैं।  कोई कहता   मरने के बाद  परमात्मा तुम्हे कर्मों का हिसाब करके जन्नत भेजेंगे कोई कहता हैं  नदियों में नहा से लेने से मरने के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं ।  मैं कहता हूँ एक बार  अपनी माँ की नजरो से नजर मिलाकर उनके पैर में झुक कर देखो । उनके  चेहरे पर   जो  उस वक़्त ...

आदरणीय pm मोदी जी और बेयर ग्रिल्स का एपिसोड(Man vs Wild)

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क्या बात हैं।  मुझे यह एपिसोड बहुत अच्छा लगा। आपको पुरे show के दौरान 1 चीज जानने को मिलेगी वो है Pm जी की सादगी। bear grills ने जिस तरह pm जी का ख्याल रखा वह हम सभी के लिए एक प्रेरणा है की हमे अपनी जिम्मेदारी को कितनी विनम्रता पूर्वक स्वीकार कर उसे पूरा करना चाहिए। आदरणीय pm मोदी जी ने प्रकृति और मनुष्य के सम्बन्ध की सरल व्याख्या की। उन्होंने बताया की प्रकृति हमारी मित्र है और हमे इसके प्रति सकारात्मक होना चाहिए , आय दिन जो इसके भयंकर रूप देखने को मिलते है वह प्राकृतिक रूप से संतुलित होने का ही एक तरिका है।  हम मनुष्यो ने अथाह दोहन कर इसे जितना नुक्सान पहुचाया है उससे बचने के लिए प्रकृति अपने आप को सक्रीय रखती है। यदि हम इसके प्रति मैत्रीभाव से रहें, जागरूक और संयमी बने तो प्रकृति भी अपने आपको संयमित और संतुलित रखेगी। और किसी को कुदरत का कहर नही देखना पड़ेगा। कहने का अर्थ यही है कि यदि हम प्रकृति को नुक्सान नही पहुचाऐगे तो प्रकृति भी हमे नुक्सान नही पहुचायेगी। क्योंकि वो हमारी दोस्त है। हमारा अस्तिस्त्व केवल उसी के वजह से हैं। आप यह एपिसोड जरूर देखिये पूरी...

एक शिक्षक और एक गरीब छात्र की प्रेरणादायक कहानी

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वैसे तो मैंने ये कहानी  मैंने 8th standard में मेरे टीचर से सुना था जिसे इंटरनेट पर दोबारा पढ़कर उस समय के वो sentimemts वो आदरभाव, वो प्रेरणा जो इस कहानी को सुनने के बाद जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए मिली  उन पुराणी यादो के साथ ताजा हो गयी, सुमहरी हो गयी तो सोचा क्यों ना इसे  अपने ब्लॉग पर साझा कर दूँ।  तो आनंद लीजिये इस कहानी का जो अपने आप में एक बड़ी सीख लिए  हमे एंटरटेन करेगी। .... बाहर बारिश हो रही थी और अन्दर क्लास चल रही थी, तभी टीचर ने बच्चों से पूछा कि अगर तुम सभी को 100-100 रुपये दिए जाए तो तुम सब क्या क्या खरीदोगे ? किसी ने कहा कि मैं वीडियो गेम खरीदुंगा l किसी ने कहा मैं क्रिकेट का बेट खरीदुंगा l किसी ने कहा कि मैं अपने लिए प्यारी सी गुड़िया खरीदुंगी, तो किसी ने कहा मैं बहुत सी चॉकलेट्स खरीदुंगी l एक बच्चा कुछ सोचने में डुबा हुआ था l टीचर ने उससे पुछा कि तुम क्या सोच रहे हो ? तुम क्या खरीदोगे ? बच्चा बोला कि टीचर जी, मेरी माँ को थोड़ा कम दिखाई देता हैं तो मैं अपनी माँ के लिए एक चश्मा खरीदूंगा ‌l टीचर ने पूछा, तुम्हारी माँ के लिए चश्मा तो ...