Preventing Child Abandonment: Why India Needs a Dedicated Commission and Stricter Punishment

Protection of Abandoned Newborn Children: 

आज हमारे देश में एक बहुत ही कड़वी और दर्दनाक सच्चाई हमारे सामने है। हर साल हज़ारों मासूम नवजात बच्चों को झाड़ियों में, कचरे के ढेरों में या अस्पतालों के पीछे लावारिस छोड़ दिया जाता है या फेंक दिया जाता है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल बच्चों को लावारिस छोड़ने (Exposure and Abandonment of Child) और शिशु हत्या (Infanticide) के मामले दर्ज होते हैं। यह सिर्फ़ एक कानूनी अपराध नहीं है, बल्कि हमारे समाज की इंसानियत पर एक बहुत बड़ा धब्बा है।

इन मासूमों की जान बचाने, उन्हें पूरा अधिकार देने और समाज में उन्हें बराबरी का सम्मान दिलाने के लिए हमें कागज़ी नियमों से आगे बढ़कर कुछ ठोस कदम उठाने होंगे।

1. Council for Motherhood and Prevention of Child Abuse

भारत में बाल अधिकारों के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) जैसी संस्थाएँ पहले से हैं, लेकिन वे बच्चों के सभी तरह के मामलों (जैसे बाल श्रम, शिक्षा और बाल विवाह) को एक साथ देखती हैं। लावारिस फेंके जाने वाले बच्चों के लिए हमारे देश में एक पूरी तरह समर्पित आयोग (Dedicated Commission) होना चाहिए, जिसका नाम "Council for Motherhood and Prevention of Child Abuse" हो।

इस समर्पित आयोग का मुख्य काम बिल्कुल साफ़ और सीधा होना चाहिए:

  • Safe Surrender : यदि कोई मजबूर माता-पिता बच्चे को पालने में असमर्थ हैं, तो वे बिना किसी डर या बदनामी के इस आयोग के सुरक्षित केंद्रों पर आकर बच्चे को सौंप सकें। 

  • Total security - No Brainwash: जब कोई व्यक्ति बच्चे को सौंपने आए, तो वहाँ कोई पुलिसिया पूछताछ, कोई मानसिक दबाव या कोई मोरल पुलिसिंग नहीं होनी चाहिए। वहाँ का स्टाफ़ बच्चे को सुरक्षा देगा, उसे गले लगाएगा (Hugs) और प्यार से स्वीकार करेगा।

  • Child count wise Funding : इस आयोग के पास एक मज़बूत और निश्चित बजट होना चाहिए, जो सीधे बच्चों की संख्या (Child Count) के हिसाब से तय हो। इस फंड का एक-एक पैसा सिर्फ़ और सिर्फ़ उन बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएँ और पूरा जीवन सपोर्ट देने में खर्च होना चाहिए।

2. Distinction from Child's Parental past

अक्सर देखा जाता है कि जिन बच्चों के माता-पिता ने समाज में कोई अपराध किया है या जो जेल में हैं, समाज और सिस्टम उन बच्चों को भी दोषी की तरह देखने लगते हैं। स्कूलों में दाखिले के समय या सरकारी दस्तावेज़ों में उनके माता-पिता के क्रिमिनल रिकॉर्ड के कारण उन बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित (Harass) किया जाता है।

इस आयोग के तहत एक कड़ा नियम होना चाहिए कि किसी भी बच्चे को उसके जैविक माता-पिता के अतीत या अपराधों से कभी नहीं जोड़ा जाएगा। हर बच्चा एक स्वतंत्र नागरिक है और भारत की अमूल्य संपत्ति (Asset) है। किसी भी स्कूल या पुलिस वेरिफिकेशन में माता-पिता के क्रिमिनल बैकग्राउंड के आधार पर बच्चे के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

"हर बच्चा एक स्वतंत्र नागरिक है और भारत की अमूल्य संपत्ति (Asset) है। किसी के अपराध का दाग बच्चे पर नहीं लगाया जा सकता।"

किसी बच्चे को उसके माता-पिता के अपराधों के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। हर बच्चे को अपनी पहचान बनाने, सम्मान के साथ जीने और अपने भविष्य का निर्माण करने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।

3.Anti-Bullying & Dignity Act

यह हमारी इंसानियत की सबसे बड़ी हार है, जब समाज में या स्कूलों में बच्चों को "अनाथ" या "अपराधी का बच्चा" बोलकर चिढ़ाया जाता है। यह सोशल बुलिंग एक मासूम के आत्मसम्मान को अंदर से पूरी तरह खोखला कर देती है।

इसके खिलाफ़ एक विशेष कानून—'Anti-Bullying and Child Dignity Act' बनना चाहिए।

  • Harsh Punishment: किसी भी बच्चे की पारिवारिक पृष्ठभूमि या गोद लेने के इतिहास को लेकर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना एक गंभीर कानूनी अपराध होना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और अपराध की गंभीरता के अनुसार सज़ा का प्रावधान होना चाहिए।

  • School and Institutional Responsibility: हर स्कूल, कॉलेज और आवासीय सोसायटी में ऐसा माहौल बनाना अनिवार्य होना चाहिए, जहाँ हर बच्चे को वही सम्मान और गरिमा (Dignity & Respect) मिले, जो किसी भी अन्य बच्चे को मिलती है। अगर कोई संस्थान किसी बच्चे के खिलाफ़ होने वाली ऐसी बुलिंग को नहीं रोकता, तो उस संस्थान के खिलाफ़ भारी जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

किसी भी बच्चे की कीमत इस बात से तय नहीं होती कि उसके माता-पिता कौन थे या उन्होंने क्या किया; हर बच्चा देश का भविष्य है।

बच्चे की पारिवारिक पृष्ठभूमि, उसके माता-पिता के अपराध या उसके गोद लिए जाने का इतिहास कभी भी उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने का कारण नहीं बनना चाहिए। हर बच्चे को बिना किसी भेदभाव के प्यार, सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।

Equal Respect for Every Child

हमें सामाजिक स्तर पर ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहाँ कोई भी इंसान इन बच्चों को अजीब नज़रों से न देखे। हर बच्चा भगवान का रूप है और वह इस देश का भविष्य है।

बच्चा कोई भी हो, हर बच्चा भारत का असली Asset है। उन्हें तरस या दया नहीं, बल्कि बेहतरीन शिक्षा, प्यार और सम्मान मिलना चाहिए।

एक बच्चे का मूल्य इस बात से तय नहीं होता कि उसके माता-पिता कौन थे या उन्होंने क्या किया; उसका मूल्य अनंत है। हर बच्चा अपने आप में एक स्वतंत्र पहचान रखता है और उसे जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।

जब हम हर बच्चे को भारत का Asset मानकर उसे असीम प्यार, बेहतरीन शिक्षा, उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएँ और कानूनी सुरक्षा देंगे, तभी हम एक सच्चे, संवेदनशील और मानवीय राष्ट्र का निर्माण कर पाएँगे।

Why Death Penalty is must

नवजात बच्चों को लावारिस फेंकने वाले ऐसे अपराधियों के लिए फांसी की सजा (Death Penalty) की मांग बिल्कुल जायज है, क्योंकि इसके पीछे बेहद मजबूत और अकाट्य तर्क हैं:

• This Is Not a 'Mistake' or an 'Error': कोई भी व्यक्ति समाज में यह बहाना नहीं बना सकता कि उसने "पैसा नहीं होने के कारण" या "गलती से" बच्चे को कचरे के ढेर या नाली में छोड़ दिया था। कोई भी इंसान गलती से भी अपने बच्चे को कहीं नहीं छोड़ सकता। जो सच्चे माता-पिता होते हैं, वे तंगी में भी अपने बच्चों को कभी नहीं फेंकते, बल्कि सीने से लगाकर रखते हैं।

• An End to Pretence and False Excuses: अक्सर ऐसे मामलों में जब पुलिस कार्रवाई होती है या एफआईआर (FIR) दर्ज होती है, तो पकड़े जाने पर अपराधी कानूनी सजा से बचने के लिए ढोंग करने लगते हैं। वे कहते हैं कि "हमसे गलती हो गई थी, हमें हमारा बच्चा वापस देने के लिए धन्यवाद।" यह कोई भूल नहीं, बल्कि एक प्रॉपर क्राइम (Proper Crime) है। ऐसे अपराधियों को कोई कानूनी छूट या सहानुभूति नहीं मिलनी चाहिए।

• Violation of the Right to Life: एक नवजात बच्चा बिल्कुल मासूम और छोटा होता है। वह कुछ नहीं जानता कि उसे नाली में फेंक दिया जाए तो क्या होगा, या किसी दूसरे को बेच दिया जाए तो उसके साथ क्या होगा। कचरे के ढेर में पड़े उस मासूम बच्चे को कितने खतरनाक बैक्टीरिया और माइक्रोब्स (Microbes) इन्फेक्ट करते हैं। यह पूरी स्थिति अकल्पनीय है! यह सिर्फ एक छोटा अपराध नहीं है, बल्कि उस मासूम के जीने के अधिकार को बेरहमी से कुचलना है।

• A Serious Threat to Society: जो व्यक्ति अपने खुद के पैदा किए हुए बच्चे के साथ ऐसा कर सकता है, उसकी जान खतरे में डाल सकता है, वह समाज में किसी दूसरे के बच्चों के साथ भी ऐसा कर सकता है। ऐसा व्यक्ति समाज में कोई भी दूसरा काम ईमानदारी या अच्छाई से कैसे करेगा? यह सब कुछ होने के बाद भी किसी व्यक्ति की ऐसी घटिया मानसिकता को दर्शाता है जो समाज पर एक बहुत बड़ा धब्बा है।

• Every Child Is a Part of India: चाहे गलती किसी व्यक्ति की हो, समाज की हो या देश की व्यवस्था की—सजा उस बेकसूर बच्चे को नहीं मिलनी चाहिए। भारत का हर एक बच्चा इस देश का बेटा-बेटी है। वह पूरा प्यार, सुरक्षा, और पूरी केयर (Care & Protection) डिजर्व करता है। बच्चों को फेंकना, उनकी अनदेखी करना, उन्हें बीमार करना या उन्हें बेचना—यह मानवता के खिलाफ बहुत बड़ा अपराध है।

Final Demand: Mandatory Death Penalty

अतः, इस अकल्पनीय क्रूरता को जड़ से खत्म करने का एकमात्र रास्ता यही है कि ऐसे क्रिमिनल माता-पिता को सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा दी जाए।



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